October 3, 2008 at 5:57 pm · Filed under Poetry
एक हादसे के इर्द गिर्द जमी भीड़ सा कुछ दिखा मंज़र
पास आया तो समझा के लोग ताक रहे थे मेरी ही लाश को
लोग खुश थे… हादसा उनके साथ नहीं हुआ था
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