Archive for अक्टूबर 10, 2008

नये चेहरे

मैं
चेहरे नये
गढ़ लेता हूँ

जब…
पुराने लोगों से मिलता हूँ

हैरान हूँ
के वो
खुश भी हो जाते हैं
नये चेहरे देख कर

टिप्पणियाँ (1)

तन्हा हूँ मैं

चाँदनी रात है…
पर तन्हा हूँ मैं
चाँद भी मेरी तरह उदास है
फिर भी तन्हा हूँ मैं

इक बहाना है
तुझे भुलाने का
(वैसे पीता नहीं हूँ मैं)
जाम भी शोकसार है
फिर भी तन्हा हूँ मैं

किसी के काँधे पर सर रख कर
बहुत रोया हूँ
आँख उसकी भी लाल है
फिर भी तन्हा हूँ मैं

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